अनुभूति
🌷 अनुभूति 🌷 हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय..... दरद की मारी बन बन डोलूं बैद मिल्यो नही कोय॥ ना मैं जानू आरती वन्दन, ना पूजा की रीत। लिए री मैंने दो नैनो के दीपक लिए संजोये॥ घायल की गति घायल जाणै, जो कोई घायल होय। जौहरि की गति जौहरी जाणै की जिन जौहर होय॥ सूली ऊपर सेज हमारी, सोवण किस बिध होय। सुन मंडल मे सेज पिया की, मिलणा किस बिध होय। दरद की मारी बन-बन डोलूं बैद मिल्या नहिं कोय। मीरा की प्रभु पीर मिटेगी जद बैद सांवरिया होय॥ मेवाड़ की रानी मीराबाई संत शिरोयणी रविदास जी की शिष्या थी। उनकी सखि सहेलियाँ गुरु रविदास जी पर नाक-मुँह चढाती थी। वे मीराबाई को ताने देती थी कि आप खुद शाही महलों में रहती हैं। पर आपके गुरु जूते गाँठकर बड़ी मुश्किल से गुज़ारा करते हैं। मीराबाई को इस बात का बहुत दुख ह...