सृष्टिकर्ता कबीर साहिब
.
सृष्टि कर्ता/ सृष्टि रचियता/ पूर्ण परमेश्वर/ पुर्ण परमात्मा/पुर्ण ब्रह्म/ परम अक्षर ब्रह्म ये शब्द एक ही शक्ति के है। वह पुर्ण शक्ति कबीर साहेब जी हैं। पूर्ण परमेश्वर कभी माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेता। परमात्मा स्वमभू होता है। वह स्वम् शिशु रूप धारण कर प्रगट होता है। परमात्मा कबीर साहेब जी काशी के कमल के फूल पर प्रकट हुए।
कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी ड़ार।
तीनों देवा शाखा हैं, ये पात रूप संसार।।
केवल कबीर साहिब जी ही संसार रूपी वृक्ष की सही स्थिति बताई है। जिसकी जानकारी गीता अध्याय 15 श्लोक 1-4 में भी है। गीता ज्ञान दाता ब्रह्म को भी इसकी पूर्ण जानकारी नहीं है।
परमात्मा कबीर साहेब जी ने बताया है कि श्री कृष्ण जी विष्णु अवतार हैं जो केवल सोलह कलाओं के भगवान हैं। इनसे अलग असंख्य कलाओं का प्रभु भी है जिसका नाम कविर्देव /कबीर साहिब है। उसकी भक्ति से पूर्ण सुख, परम शान्ति व मोक्ष मिलेगा। राम और कृष्ण जी माँ के गर्भ से जन्म लेते है।
“कबीर, चार भुजा के भजन में, भूल परे सब संत।
कबीरा सुमरै तासु को, जाके भुजा अंनत।।”
कुछेक मेरे भाई जन कहते है कि श्रीकृष्ण जी ने ताम्रध्वज के पुत्र को आरे से चिरवा कर जीवित कर दिया था। श्री कृष्ण जी ने अपने भांजे अभिमन्यु को जीवित नहीं कर पाए। क्योंकि ताम्रध्वज के पुत्र की आयु शेष थी जबकि अभिमन्यु की आयु शेष नहीं बची थी। सिर्फ परमात्मा कबीर ही हमारी आयु बढ़ाकर हमें जीवन दान दे सकते हैं।
सतोगुणी भगवान विष्णु जी तीन लोक में अवतार धारण कर राक्षसों का वध करते हैं वहीं दूसरी तरफ समस्त ब्रह्मण्डों के मालिक परमात्मा कबीर जी काम, क्रोध, मोह, लोभ व अहंकार रूपी अवगुणों को खत्म कर राक्षस को भी भक्त बना देते हैं।
श्री कृष्ण जी सतोगुणी भगवान विष्णु जी के अवतार थे। उन्होंने महाभारत के युद्ध को टालने की भरपूर कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए। लेकिन परमात्मा कबीर साहिब जी ने अपने सतलोक गमन के समय अपने शरीर को लेकर होने वाला युद्ध खत्म कराया। हिंदू काशी नरेश वीर सिह बाघेल और मुस्लिम मगहर के नबाब बिजली खान पठान दोनो अपनी अपनी सेना लेकर आमने सामने खडे थे। परमात्मा कबीर साहिब जी ने होने वाले भयंकर युद्ध को अपनी विशेष लीला सशरीर सतलोक गमन के द्वारा टाल दिया।
काल ने सतोगुणी भगवान विष्णु अवतार श्री कृष्ण जी के शरीर का दुरुपयोग किया और कभी युद्ध ना चाहने वाले श्रीकृष्ण जी के अंदर प्रेतवश प्रवेश कर महाभारत का युद्ध करवाया।
जो पूर्ण परमात्मा कबीर जी की शरण में नहीं हैं, वे सभी काल के शिकंजे में हैं। भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण जैसी पुण्य आत्मा भी पूर्ण परमात्मा कबीर जी की पहचान न होने के कारण काल जाल से अछूती नहीं थी। जिस कारण काल ने उनके शरीर में प्रेतवत प्रवेश होकर महाभारत का भयंकर युद्ध करवाया।
गीता अध्याय 11 श्लोक 32 मे इसका पुरा वर्णन है। उसमे प्रवृद्धे शब्द साफ है।जिसका मतलब दुसरे के शरीर में प्रवेश कर बोलने वाला भगवान। श्लोक मे खुद कह रहा है कि कि मै दुसरे मे बढा हुआ काल हू।अभी पर्वर्त हुआ हू। दोस्तों! कृष्ण भगवान तो अर्जुन के साथ पहले भी थे।
कबीर साहेब ने मृत कमाल ओर कमाली को जीवित कर दिया। जबकि कृष्ण जी अपने भांजे अभिमन्यु को जीवित न कर सके। दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी द्वारा स्वामी रामानंद का काटा गया शीश को पुनः लगाया और स्वामी रामानंद को जीवंत किया।ऐसे अनेकों उदाहरण है। ऐसी लीला सिर्फ पूर्ण परमात्मा ही कर सकते हैं।
गीता अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाला प्रभु काल कह रहा है कि ‘हे अर्जुन यह मेरा वास्तविक काल रूप है'। क्या भगवान श्री कृष्ण जी काल थे? कौन है, समर्थ भगवान श्री कृष्ण जी तो 16 कला के मालिक हैं। और कबीर साहेब जी तो अंनत कला के मालिक हैं। समर्थ परमात्मा अनन्त कोटि कला के भगवान है।
दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण सारा यादव कुल नष्ट हो गया भगवान कृष्ण के सामने। पूर्ण परमात्मा कबीर जी तीन ताप के कष्ट से बचाते हैं और प्रारब्ध के लेखे को भी परिवर्तित कर सकते हैं।
श्रीकृष्ण जी पांडवों के अश्वमेघ यज्ञ में उपस्थित थे लेकिन उनकी यज्ञ सम्पूर्ण नहीं हो पाई थी। लेकिन सुपच सुदर्शन के रूप में आये पूर्ण परमात्मा कबीर जी ने वह यज्ञ सम्पूर्ण की। श्री कृष्ण जी चतुर्भुजी भगवान हैं जबकि पूर्ण परमात्मा कबीर जी असंख्य भुजाओं वाले भगवान हैं।
काल ने श्री कृष्ण जी जैसी पुण्य आत्मा, जोकि युद्ध नहीं चाहती थी, उनके शरीर में प्रवेश कर महाभारत का युद्ध करवा दिया, करोड़ों व्यक्ति मरवा दिए और गीता जी अध्याय 11 के श्लोक नंबर 32 में अपनी पहचान भी बता दी कि मैं बढ़ा हुआ काल हूं और इन सब को खाने के लिए अब प्रकट हुआ हू।
परमेश्वर कबीर साहेब जी कहते हैं कि,
कबीर, तीन गुणन की भक्ति में, भूलि पड्यो संसार।
कहै कबीर निज नाम बिन, कैसे उतरै पार।।
कबीर, गोवर्धन कृष्ण जी उठाया, द्रोणागिरि हनुमंत।
शेष नाग सब सृष्टी उठाई, इनमें को भगवंत।।
कबीर साहिब जी कहते हैं कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया, हनुमान जी ने द्रोणागिरि पर्वत उठाया जिसके कारण आप जी इन्हें भगवान मान बैठे हो और आप जी ही बताते हो कि शेषनाग ने सारी सृष्टि अर्थात ब्रह्मांडों को उठाया हुआ है तो इनमें पूर्ण परमात्मा कौन हुआ ?
कबीर, राम कृष्ण अवतार हैं, इनका नाहीं संसार।
जिन साहब संसार किया, सो किनहु न जनम्यां नारि।।
परमात्मा कबीर साहिब जी कहते हैं कि श्री राम, श्रीकृष्ण तो तीन लोक के स्वामी श्री विष्णु जी के अवतार हैं जोकि माँ के गर्भ से जन्म लेते हैं। भगवान विष्णु स्वम देवी दुर्गा के गर्भ से जन्म लेते है। और मृत्यु को प्राप्त होते हैं, इनकी बनाई सृष्टि नहीं है। जिस परमात्मा ने सर्व सृष्टि की रचना की है वह कभी माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेता और न ही मरता । - प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 93 मंत्र 2
तत्वदर्शी संत का वर्णन गीता जी अध्याय 4 श्लोक 34 में है। गीता ज्ञान दाता परमात्मा की प्राप्ति के लिए तत्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए कह रहा है। वो तत्वदर्शी महात्मा संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं। उनसे नाम उपदेश लेकर मोक्ष प्राप्त करें।
श्री कृष्ण जी त्रिलोकीय भगवान हैं लेकिन समस्त लोकों के स्वामी पूर्ण परमात्मा कबीर हैं जिनकी पूर्ण संत के माध्यम से प्राप्ति के लिए देवता भी श्रीकृष्ण व श्रीराम रूप धारण कर धरती पर अवतार रूप में आए।
वासुदेव पूर्ण परमात्मा कबीर जी ही हैं। गीता बोलने वाला काल कहता है की ‘‘वासुदेव’’ ही सब कुछ है यही सबका सृजनहार है। यही पापनाशक, पूर्ण मोक्षदायक, यही पूजा के योग्य है। यही वासुदेव कुल का मालिक परम अक्षर ब्रह्म है। केवल इसी की भक्ति करो, अन्य की नहीं।
वासुदेव शब्द का अर्थ है जिसकी सब लोको मे सता हो। जैसे एक मुख्यमंत्री की सता उसके प्रान्त मे है। प्रधानमंत्री की सता पुरे देश मे है।काल भगवान ज्योतनिरंजन की सता इसके इक्कीस ब्रह्माण्ड मे है जिसमे हम रह रहे है। कबीर साहिब जी कुल के वासुदेव है। असली वासुदेव कबीर साहिब जी है।
वेदों मे बहुत सारे श्लोकों मे स्पष्ट लिखा है कि कबीर साहिब सृष्टिकर्ता है। ये बन्धनो के शत्रु है। ये पापो के शत्रु है। ये सतलोक के रहने वाले पुरी श्रृष्टि के स्वामी है।यही मोक्ष दाता है।
शास्त्रानुकूल साधना से ही मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है।आज पुरे विश्व में शाशत्रानुकुल साधना केवल संत रामपाल जी महाराज ही बताते है। आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए।
साधना चैनल पर प्रतिदिन शाम 7:30 से 8.30 बजे
श्रधा चैनल पर प्रतिदिन दोपहर 2:00से 3:00 बजे
सत साहिब जी
Comments
Post a Comment
ऐसे ही अध्यात्मिक जानकारी के लिए हमसे जुड़े।