चर्चा मस्तनाथ व गरीबदास जी
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रोहतक के पास मठ अस्थल बोहर के संत बाबा मस्तनाथ जी महाराज बडे तपस्वी और सिद्धि युक्त थे। कहते कि एक सिद्धि युक्त थे संत को दुसरे संत से ईर्ष्या होती है। सिध्दि युक्त संत मे अपनी प्रभुता की लालसा होती है। ऐसे संत थे बाबा मस्तनाथ।
बाबा मस्तनाथ ने सुना कि कोई जाट जाती का संत छुडानी जिला झज्जर में है तो वो उनकी जांच और सामर्थ देखने छुडानी गांव पहुंच गये। छुडानी जाकर बाबा मस्तनाथ कि बोला गरीबदास कौन है ..?
सामने गरीबदास जी बैठे थे गरीब दास जी ने बोला दास का नाम गरीबदास है जी। आओ नाथ जी पधारो जी भोजन पानी ग्रहण करो इतने में गांव वाले वहां आ गये कि नाथ जी आये है।
नाथ जी बोले गरीबदास कौनसा पंथ है तुम्हारा ..? गरीबदास जी बोले आदि अनादि का पंथ है हमारा थोडी ज्ञान चर्चा हुयी पर बातो से ना जीतता देख मस्तनाथ जी ने एक मुगदर (पहलवानो की कसरत की वस्तु) जो 40kg का होता है उठाकर आसमान में फेंक दिया और 150 फिट ऊंचाई पर रोक दिया।
बाबा मस्तनाथ महाराज जी ने गरीबदास जी ने कहा महाराज यह काम तो जादूगर करते है। इन बातों से आत्मकल्याण का इन बातो से कोई लेना देना नही है । मस्तनाथ जी बोले हे कोई सिद्धी तो उतार के दिखाओ। गरीबदास जी ने अपने दुसरे नम्बर वाले पुत्र सुरतिदास को कहा बेटा महाराज जी के लिये मुगदर उतार दे।
सुरतिदास ने हाथ लम्बा किया और मुगदर नीचे बाबा मस्तनाथ के पास ला कर रख दिखा।
अपनी बात नही बनती देख मस्तनाथ जी ने छुडानी में आग लगा दुंगा। गरीब दास जी बोले संत तो गांव बसाते है उजाडते नही आप अपनी सिद्धी से कुआ बना दो जन पानी पियेंगे। आपकी महिमा का गुणगान किया करेंगे। पर मस्तनाथ जी ने पश्चिम की और आग लगा दी।
गरीबदास जी ने वहीं बैठे बैठे हाथ घुमाया वो आग तो बुझ गयी। पर वो आग बाबा मस्तनाथ जी महाराज के मठ अस्थल बोहर रोहतक में लग गई। गरीबदास जी बोले कि अब आप अपनी आग बुझा लो मस्तनाथ ने सिद्धी से देखा तो सचमुच अस्थल बोहर में आग लग गयी फिर मस्तनाथ जी ने क्षमा याचना की और गरीबदास जी ने शिक्षा दी फिर मस्तनाथ जी ने परमार्थ के काम किये।
शास्त्रानुकूल साधना से ही मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है।आज पुरे विश्व में शाशत्रानुकुल साधना केवल संत रामपाल जी महाराज ही बताते है। आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए।
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सत साहिब जी
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