तम्बाकू सेवन तो दूर हाथ तक नहीं लगाते।
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हरियाणा के जींद जिले मे एक छोटा सा गाव है मालखेडी। यहा पर कोई भी ग्रामीण तम्बाकू का प्रयोग नही करता। यह गांव अज से दो सौ पिचतर साल पहले एक श्राप के कारण ग्रस्त है। वैसे तो ये श्राप नही हम इसको वरदान कहेगे। एक समाज से बुराई खत्म है।
इस गांव मे यदि कोई हुक्का पीने वाला मेहमान भी आ जाता है तो उसे अपने आप हुक्का भरना का कह दिया जाता है।गांव वाले तम्बाकू और हुक्का के हाथ नही लगाते। गांव मे मोहल्ला की दुकान पर बीडी सिगरेट व इससे सम्बंधित वस्तुऐ नही मिलेगी।
दरअसल हुआ यो कि एक बार बन्दी छोड संत गरीब दास जी एक बार कहीं जा रहे थे 275 साल पहले रास्ते खेतो की पाली पगडंडियो पर से होते थे। महाराज जी अपने घोडे पर सवार होकर जा रहे थे। पगडंडी पर घोडा सरपट दौडे जा रहा था। तभी एक दम से घोडा बिदक कर पगडंडी छोड दुसरे खैतो मे जा घुसा जैसे तैसे लगाम लगा कर महाराज जी ने घोडा रोका।
आसपास के किसान खेतो में काम कर रहे और रखवाली कर रहे थे। वो हाथ में लट्ठ लेकर घोडे और गरीब दास जी को पीटने दौड पडे कि हमारी खडी फसल में घोडा दौडा कर खराब कर रहे हो। अभी निकालते है तेरा चौधरीपना जैसे ही उन्होने हाथ उठाना चाहा सब स्टेचू से बने जाम हो गये। ना हाथ बढ पा रहा था ना पीछे हो पा रहा था। जैसे तैसे उन्होने क्षमा मांगी और लट्ठ नीचे डाल कर माफी मांगने लगे।
वो गरीब दास जी से बोले आप घोडे को खेत मे ले आये हमारी फसल खराब होती है आप को पता ही है हम कितनी मेहनत कर फसल खडी करते है गरीब दास जी बोले घोडा यूं ही नही बिदका है उस पगडंडी वाले खेत में पिछली फसल क्या बोई थी किसान बोले जी तम्बाकू बोई थी। तब गरीबदास जी बोले तम्बाकू की फसल पिछले मौसम मे बोई और उसकी बदबू अब भी आ रही है कि जानवर भी पसंद नही कर रहे है तो फिर हम तो इंसान है।
वादा करोगे अब नही बोओगे ना प्रयोग करेंगे किसानो ने वादा किया जी , अब नही बोयेंगे ना प्रयोग करेंगे । फिर गरीब दास जी आगे निकल गये गांव में फिर शाम को किसान घर आये तो देखा सब हुक्के टूट फूट गये फिर किसी ने कोशिश की तो हानि होने लगी फिर संत गरीबदास जी के दिये वचन पर उस गांव में तम्बाकू का प्रयोग वर्जित हो गया।
शास्त्रानुकूल साधना से ही मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है।आज पुरे विश्व में शाशत्रानुकुल साधना केवल संत रामपाल जी महाराज ही बताते है। आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए।
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सत साहिब जी
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