नरक लोक का वर्णन
गरीब, जम किंकर के धाम कूं, साईं न ले जाय।
बड़ी भयंकर मार है, सतगुरु करै सहाय
गरीब, कारे कारे किंगरे, नीला जम का धाम ।
जेते जामे जीव है, नहीं चैन विश्राम ।
गरीब, है तांबे की धरतरी, चोरासी मध कुंड ।
आदि अंत के जिव जित, होते रुंडक मुंड।
गरीब, चोरासी जहाँ कुंड हैं, खंभ अनंत अपार।
करनी भुगते आपनी, नाना बिधि की मार।
गरीब, चोदा कोटि भयंकरम, चोदा मुनि दिवान।
कोटि कोटि ताबै किये, साईं का फुरमान।
गरीब, रुधिर भरे जहाँ कुंड हैं, कुंभी जिनका नाम
द्वारा हैं मुख लोड का, बड़ा भयंकर धाम।
गरीब, सो सो योजन कुंड है, गिरद गता बहु भीर।
कोट्यो जिव उसारिये, कहिं न पावै थीर ।
गरीब, हाथ पैर जिनके नहीं, नहीं सीस मुखद्वार।
तलछू माछू होत हैं, परै गैब की मार।
गरीब, लघुसी बानी कहत हूँ, दीरघ कही न जाय।
जम किंकर की मार से, साईं लेत छुड़ाय
गरीब, नीले जिनके होंठ हैं, काली जिनकी जीभ।
चिसमे जिनके लाल है, रक्त टपकै पीव।
गरीब, सूर स्वान के मुख बने, धड़ तो जिनकी देह।
दस्तो जिनके गुर्ज हैं, मारे निर संदेह।
गरीब, स्याम वर्ण शंका नही, दागड दुम खलील।
उरध चुंच मुख काग का, चिसमे जिनके नील।
गरीब, शक्ति सरुपी तन धरै, लघु दीरघ हो जाहिं।
बाहर भीतर मार हैं, तन कूं बहु विधि खाहिं
गरीब,कोटि-कोटि की जोट हैं,कोटि-कोटि एक।
संग एका-एकी फिरत है, ऐसेभयंकर अंग।
जय हो बन्दिछोड़ की
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