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Showing posts from January, 2022

कविर्देव, (कबीर साहेब )

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पवित्र वेदो में , श्रीमद्भगवद्गीता में , गुरू ग्रन्थ साहिब जी में , कुरान शरीफ में एक ही परमात्मा का नाम है , कविर्देव कबीर (कबीर साहेब जी) |  फिर भी लोग उसे नजर अंदाज करते रहे तो वो उल्लू जैसी प्रवति के ही है जो सूर्य के अस्तित्व को नकारते हैं  उल्लू की मजबूरी रही हो आप तो आंखो वाले है धर्म ग्रन्थ खोलकर संत रामपाल जी महाराज के सत्संग से मिलाकर देख लिजिए अपनी शिक्षा का सदुपयोग करीए....  परमात्मा कलियुग में जिन सन्तों को आकर मिले उन्हें सतलोक दिखाया वह इस प्रकार है... स्वामी रामानन्द जी धर्मदास जी नानक जी गरीबदास जी दादू जी घीसा जी मलूक दास जी आदि इन्होंने परमात्मा को सतलोक में देखा और उसकी महिमा गायी और कहा कि काशी वाला कबीर जुलाहा ही पूर्ण परमात्मा(सत्पुरुष/कविर्देव) है।  वह चारों युगों में पृथ्वी पर आते है सतयुग में सतसुकृत जी त्रेतायुग में मुनिन्द्र ऋषि जी द्वापरयुग में करूणामय जी  कलियुग में वास्तविक नाम कबीर साहेब जी और अपना तत्वज्ञान देकर जाते है। परमात्मा को आँखों देखा सभी संन्तों ने काशी वाले कबीर जुलाहे को ही पूर्ण परमात्मा बताया है। हम सुलतानी नानक तार...

मुनिन्द्र ऋषि

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श्री लंका ( सिंहल ) में चन्द्रविजय नाम से एक भाट था वो शिव जी का उपासक था । एक दिन मुनिन्द्र ऋषि नलनील के गुरूदेव श्री लंका गये चन्द्रविजय ने संत को देखकर प्रणाम सत्कार किया बोला हे ऋषिवर दास की कुटिया पर पधारे  हमें आपकी सेवा का सुअवसर मिले ।   मुनिन्द्र ऋषि बोले हे चन्द्रविजय मै सिर्फ उन के घर जाता हुं जो परमेश्वर की भक्ति करते है चंद्रविजय बोला महाराज मै शिव का उपासक हुं और पुरा श्री लंका (सिंहल) शिव की आराधना करता है स्वयं लंकापति भी शिव के भक्त है । फिर मुनिन्द्र ऋषि ने सृष्टी रचना सुनाई कि बह्मा विष्णु शिव की उत्पति से पुर्व का सारा ज्ञान दिया चंद्रविजय कुछ देर मुंह बनाता रहा फिर धीरे धीरे वह ज्ञान उसके हदय में घर कर गया और उसने मुनिन्द्र ऋषि को गुरू बनाकर उपदेश ले लिया | फिर मुनिन्द्र ऋषि उसके घर गये तब उसकी पत्नी कर्मवति ने भी ज्ञान सुन उपदेश ग्रहण कर लिया |  अब कर्मवति चंद्रविजय की पत्नी रोज महारानी मंदोदरी के मनोरंजन के लिये चुटकुले और हंसी ठहाके की बाते सुनाकर मन बहलाया करती थी वो अगले दिन गयी तो उसने वही मुनिन्द्र ऋषि वाला ज्ञान महारानी मंदोदरी को सुनाया ...