कविर्देव, (कबीर साहेब )

पवित्र वेदो में , श्रीमद्भगवद्गीता में , गुरू ग्रन्थ साहिब जी में , कुरान शरीफ में एक ही परमात्मा का नाम है , कविर्देव कबीर (कबीर साहेब जी) | 
फिर भी लोग उसे नजर अंदाज करते रहे तो वो उल्लू जैसी प्रवति के ही है जो सूर्य के अस्तित्व को नकारते हैं 
उल्लू की मजबूरी रही हो आप तो आंखो वाले है धर्म ग्रन्थ खोलकर संत रामपाल जी महाराज के सत्संग से मिलाकर देख लिजिए अपनी शिक्षा का सदुपयोग करीए.... 

परमात्मा कलियुग में जिन सन्तों को आकर मिले उन्हें
सतलोक दिखाया वह इस प्रकार है...

स्वामी रामानन्द जी
धर्मदास जी
नानक जी
गरीबदास जी
दादू जी
घीसा जी
मलूक दास जी आदि

इन्होंने परमात्मा को सतलोक में देखा और उसकी
महिमा गायी और कहा कि काशी वाला कबीर
जुलाहा ही पूर्ण परमात्मा(सत्पुरुष/कविर्देव) है।  वह चारों युगों में पृथ्वी पर आते है

सतयुग में सतसुकृत जी
त्रेतायुग में मुनिन्द्र ऋषि जी
द्वापरयुग में करूणामय जी 
कलियुग में वास्तविक नाम कबीर साहेब जी

और अपना तत्वज्ञान देकर जाते है। परमात्मा को
आँखों देखा सभी संन्तों ने काशी वाले कबीर जुलाहे
को ही पूर्ण परमात्मा बताया है।

हम सुलतानी नानक तारै, दादू को उपदेश दिया।
जात जुलाहा भेद न पाया, काशी माहे कबीर हुआ॥
-गरीबदास जी

सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान॥
-गरीबदास जी

बोलत रामानन्द जी, सुनो कबीर करतार।
गरीबदास सब रूप में, तुमहीं बोलनहार॥
-स्वामी रामानन्द जी/गरीबदास जी

जिन मोकूं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार।
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजनहार॥
-दादू दयाल जी

और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर।
दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर॥
-दादु दयाल जी

वाणी अरबों खरवो, ग्रन्थ कोटी हजार।
करता पुरुष कबीर, रहै नाभे विचार॥
-नाभादास जी

साहेब कबीर समर्थ है, आदी अन्त सर्व काल।
ज्ञान गम्या से दे दिया, कहै रैदास दयाल॥
-रैदास जी

नौ नाथ चौरासी सिद्धा, इनका अन्धा ज्ञान।
अविचल ज्ञान कबीर का, यो गति विरला जान॥
-गोरखनाथ जी

खालक आदम सिरजिआ आलम बडा कबीर॥
काइम दाइम कुदरती सिर पीरा दे पीर॥
सयदे (सजदे) करे खुदाई नूं आलम बडा कबीर॥
-नानक जी

हक्का कबीर करीम तू, बेएब परवरदीगार॥
नानक नीच कहै बिचार, ये धाणक रुप रहा करतार॥
-नानक जी

बाजा बाजा रहित का, परा नगर में शोर।
सतगुरु खसम कबीर है, नजर न आवै और॥
-धर्मदास जी

सन्त अनेक संसार में, सतगुरु सत्य कबीर।
जगजीवन आप कहत है, सुरती निरती के तीर॥
-जगजीवन जी

तुम स्वामी मै बाल बुद्धि, भर्म कर्म किये नाश।
कहै रामानन्द निज ब्रह्म तुम, हमरा ढृढ़ विश्वास।।
-रामानन्द जी

चार दाग से सतगुरु न्यारे, अजरो अमर शरीर।
दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो कसम कबीर॥
जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।
जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर॥
-मलूक दास जी

हम ही अलख अल्लाह है, कुतुब गोस और पीर।
गरीबदास खालिक धणी, हमरा नाम कबीर॥
-परमेश्वर कबीर साहेब जी

वेद, गीता, कुरान, गुरु ग्रन्थ साहिब जैसे पवित्र ग्रंथो में भी कबीर साहेब जी का नाम प्रमाण सहित लिखा हुआ हैं |
#kabir_is_parameshwer

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