सतज्ञान बिना मानव जीवन अधूरा!
जिसकी जैसी भावना, उसको वैसा ही फल मिलता है। बिना सतज्ञान के मनुष्य अपना कर्म बिगाड़ लेता है।
ज्ञान वाणी -
किसी गाँव में एक साधु रहता था जो दिन भर लोगों को उपदेश दिया करता था। उसी गाँव में एक नर्तकी थी, जो लोगों के सामने नाचकर उनका मन बहलाया करती थी। अक्सर मंदिर के घंटी की तरफ आवाज सुनकर नर्तकी प्रभु के दर्शन को मन में सोचती थी वहीं साधु नर्तकी के घर से आने वाले ढोल हारमोनियम की आवाज़ को सुनकर सोचता की काश मैं भी नर्तकी का नाच देख पाता ! लेकिन समाज के डर से दोनों की इच्छा बस इच्छा ही रह गयी।
एक दिन गाँव मेँ बाढ़ आ गयी और दोनों एक साथ ही मर गये। मरने के बाद जब ये दोनों यमलोक पहुँचें तो इनके कर्मों और उनके पीछे छिपी भावनाओं के आधार पर इन्हें स्वर्ग या नरक दिये जाने की बात कही गई। साधु खुद को स्वर्ग मिलने को लेकर पुरा आश्वस्त था। वहीं नर्तकी अपने मन में ऐसा कुछ भी विचार नहीं कर रही थी। नर्तकी को सिर्फ फैसले का इंतजार था।
तभी घोषणा हूई कि साधु को नरक और नर्तकी को स्वर्ग दिया जाता है। इस फैसले को सुनकर साधु गुस्से से यमराज पर चिल्लाया और क्रोधित होकर पूछा , “यह कैसा न्याय है महाराज?, मैँ जीवन भर लोगों को उपदेश देता रहा और मुझे नरक नसीब हुआ! जबकि यह स्त्री जीवन भर लोगों को रिझाने के लिये नाचती रही और इसे स्वर्ग दिया जा रहा है। ऐसा क्यों?”
यमराज ने शांत भाव से उत्तर दिया ,” यह नर्तकी अपना पेट भरने के लिये नाचती थी लेकिन इसके मन में यही भावना थी कि मैं अपनी कला को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर रही हूँ। जबकि तुम उपदेश देते हुये भी यह सोचते थे कि कि काश तुम्हे भी नर्तकी का नाच देखने को मिल जाता !
हे साधु ! लगता है तुम इस ईश्वर के इस महत्त्वपूर्ण सन्देश को भूल गए कि इंसान के कर्म से अधिक कर्म करने के पीछे की भावनाएं मायने रखती है। अतः तुम्हे नरक और नर्तकी को स्वर्ग दिया जाता है। “
संदेश -मित्रों , हम कोई भी काम करें , उसे करने के पीछे की नियत साफ़ होनी चाहिए , अन्यथा दिखने में भले लगने वाले काम भी हमे पुण्य की जगह पाप का ही भागी बना देंगे।
*सत साहेब*
अवश्ये देखिये रोजाना शाम 7.30 से8.30 साधना चैनल पर अपने जीवन का हल
Comments
Post a Comment
ऐसे ही अध्यात्मिक जानकारी के लिए हमसे जुड़े।